Ṛg Veda 01.164 (Asya Vāmasya Sūkta)
Rig 1.164.04
को ददर्श प्रथमं जायमानमस्थन्वन्तं यदनस्था बिभर्ति। भूम्या असुरसृगात्मा क्व स्वित्को विद्वांसमुप गात्प्रष्टुमेतत्॥